MLC Full Form In Hindi – एमएलसी के बारे में संपूर्ण जानकारी

MLC Full Form In Hindi : नमस्कार दोस्तों, आज हम इस लेख के माध्यम से एमएलसी (MLC) के बारे में चर्चा करेंगे. एमएलसी के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी जो हमें जरूर जाना चाहिए और परीक्षा में भी पूछे जाते हैं वह सभी आज हम इस लेख के माध्यम से बताएंगे. इसके अलावा हम जानेंगे एक एमएलए (MLA) और एक एमएलसी (MLC) में क्या अंतर होता है.

MLC के बारे में जानकारी के तौर पर आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे एमएलसी कौन होते हैं, एमएलसी का फुल फॉर्म क्या होता है, एमएलसी बनने के लिए क्या योग्यताएं (qualification) होनी चाहिए, एमएलसी का निर्वाचन कैसे होता है, एमएलसी का कार्य और जिम्मेदारियां, एमएलसी का कार्यकाल कितने होते हैं और एमएलसी बनने के लिए क्या करना होता है.

MLC Full Form In Hindi

यानी एमएलसी बनने के लिए क्या करना पड़ता है, इसके लिए तैयारी किस तरह से करना चाहिए आदि इस तरह के और भी कई सारे महत्वपूर्ण जानकारियां आपको इस लेख के माध्यम से प्राप्त होंगे, तो दोस्तों एमएलसी से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे साथ अंत तक जरूर बने रहे.

MLC Full Form In Hindi ?

एमएलसी का फुल फॉर्म है (Full Form of MLC) “ Member of Legislative Council ” जिसे हिंदी में (MLC Full Form In Hindi) “ विधान परिषद के सदस्य ” कहते हैं और इन्हें कई कई जगह पर विधान परसाद भी कहा जाता है.

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विधान परिषद क्या होता है?

राज्य की विधायिका को विधानमंडल कहा जाता है और विधानमंडल के दो साधन होते हैं, 1. विधानसभा और 2. विधान परिषद.

विधानसभा भारत के प्रत्येक राज्य में मौजूद है, जबकि वर्तमान समय में विधान परिषद भारत में सिर्फ 6 राज्य में मौजूद है. विधान परिषद सिर्फ 6 राज्य में होने की वजह से सिर्फ 6 राज्य के विधान परिषद सदस्य होंगे. इन 6 राज्य में विधानसभा परिषद मौजूद है

  1. बिहार 
  2. उत्तर प्रदेश
  3. महाराष्ट्र
  4. कर्नाटक
  5. आंध्र प्रदेश
  6. तेलंगाना

इन 6 राज्यों मैं ही विधान परिषद के सदस्य होते हैं बाकी किसी भी राज्य में एमएलसी (MLC) नहीं होते हैं. और अगर विधानसभा की बात करें तो विधानसभा भारत के सभी राज्य में मौजूद होते हैं और इसके सदस्य हर राज्य में होते हैं जिन्हें एमएलए (MLA) और विधायक कहा जाता है. 

एमएलसी कैसे बनी मनी कैसे बने?

एमएलसी का चुनाव सीधे रुप से जनता के द्वारा नहीं किया जाता है बल्कि जाता के प्रतिनिधि और कुछ अन्य व्यक्ति के द्वारा इन्हें चुना जाता है. तो अगर आप एक एमएलसी (MLC) बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास दो रास्ते होते हैं, आप को चुनाव लड़ना होता है या फिर राज्यपाल के द्वारा नामांकित करना पड़ता है. 

एमएलसी बनने के लिए क्या योग्यताएं होनी चाहिए?

  • एमएलसी बनने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. 
  • मानसिक कोई समस्या नहीं होना चाहिए.
  • किसी भी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए.
  • एमएलसी बनने के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 30 वर्ष है. 

एमएलसी का निर्वाचन किस तरह से होता है?

अधिकतर एमएलसी का निर्वाचन किया जाता है जबकि कुछ एमएलसी को उस राज्य के राज्यपाल द्वारा नामांकित किया जाता है. यानी एमएलसी का चुनाव जनता के द्वारा नहीं होता है. 

➤ कुल एमएलसी का ⅓ सदस्य को नगर पालिका, जिला बोर्ड आदि के सदस्यों के द्वारा चुना जाता है.

➤ 1/12 सदस्यों होते हैं उनको राज्य के निवासी जो 3 वर्ष से स्नातक होते हैं वह निर्वाचित करते हैं. 1/12 सदस्यों का निर्वाचन जो 3 वर्ष से राज्य में अध्यापन कर रहा है उन अध्यापकों के द्वारा चुना जाता है, लेकिन इन अध्यापक न्यूनतम माध्यमिक स्कूल का होना चाहिए.

➤ ⅓ सदस्यों का चुनाव विधानसभा के सदस्यों यानी विधायकों के द्वारा किया जाता है. 

➤ बाकी 1/6 सदस्यों का चुनाव राज्यपाल के द्वारा नामांकित किया जाता है. राज्यपाल, कला, सहकारिता आंदोलन, साहित्य, ज्ञान और समाज सेवा में विशेष ज्ञान रखने वाले व्यवहारिक अनुभव वाले व्यक्ति को नामांकित करते हैं. 

एमएलसी से संबंध अक्सर पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न

A. एक राज्य में कितने एमएलसी हो सकते हैं?

एक राज्य में न्यूनतम 40 एमएलसी हो सकते हैं और अधिकतम की बात करें तो एमएलसी की संख्या विधायकों के 1/3  हो सकते हैं. 

B. एमएलसी का कार्यकाल

एमएलसी का जो कार्यकाल होता है वह 6 वर्ष का होता है. और प्रत्येक 2 वर्षों के बाद जो ⅓ एमएलसी होते हैं उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है उनका स्थानांतरित नया एमएलसी के साथ होता है.

C. एमएलसी का शक्तियां और कार्य

एमएलसी का पद राज्य में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता है. क्योंकि अगर इनका पद बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता तो यह सभी राज्यों में होते. इसका मतलब एमएलसी का शक्ति और कार्य बहुत सीमित होते हैं. जो एमएलसी होते हैं वह विशेषज्ञ की तरह होते हैं और जो विधानसभा होते हैं उसे इस विशेषज्ञ समिति के द्वारा माना जाता है, जिस तरह से केंद्र में राज्यसभा होते हैं.

जो एमएलसी होते हैं वह राज्य सरकार के द्वारा अगर कोई गलत कानून बनाया जा रहा होता है उसमें एमएलसी का पारित होना बहुत महत्वपूर्ण होता है. क्योंकि एमएलसी सदस्य का आकार होता है जो कानून लागू होने जा रहा है वह सही है या गलत है. 

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जो विधानसभा होता है उसमें सरकार का बहुमत होती है और विधान परिषद में सरकार का बहुमत हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है तो कोई ऐसा विधायक जो धन विधायक नहीं है या कोई महत्वपूर्ण विधायक नहीं है वह विधायक विधानसभा और विधान परिषद दोनों में पारित होना चाहिए, ऐसे में अगर राज्य में कोई कानून बन रहे हैं तो उसमें एमएलए के साथ-साथ एमएलसी का सहमति होना आवश्यक होता है.

विधानसभा और विधानपरिषद दोनों की सहमति से ही कानून बन सकता है. ऐसे में राज्य सरकार के ऊपर जो एक अंकुश रहती है विधान परिषद के द्वारा अगर जोक एमएलसी होते हैं वह सहमति देते हैं तभी एक कानून बन सकता है. कहीं-कहीं पर तो यह भी कहा जाता है कि राज्य परिषद होने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है शायद इसलिए ही भारत में सिर्फ 6 राज्य में विधान परिषद मौजूद है. Google

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