SIP Full Form In Hindi – एसआईपी से संबंधित विस्तार पूर्वक जानकारी

SIP Full Form In Hindi : नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस नए जानकारी में, क्या आप से SIP Investment के बारे में सुने हैं, तो चलिए आज इसके बारे में विस्तार रूप से जानकारी प्राप्त करते हैं. आज का यह लेख बहुत ही महत्वपूर्ण है तो संपूर्ण जानकारी हासिल करने के लिए हमारे साथ अंत तक जरुर बने रहे. SIP से संबंधित जानकारी के रूप में आज आप इस लेख के माध्यम से जानेंगे,

सीप का फुल फॉर्म क्या है, SIP का मतलब क्या होता है, सीप (SIP) किस तरह से काम करता है, इसका फायदा क्या है, इसमें तरह-तरह के विशेषता क्या है. और क्या आपको इसमें इन्वेस्टमेंट करना चाहिए. दोस्तों SIP investment से संबंधित इस तरह के सभी महत्वपूर्ण जानकारियां आपको इस लेख के माध्यम से संपूर्ण रूप से प्राप्त होंगे.

सीप क्या होता है?

SIP (Systematic Investment Plan) एक तरीका या जरिया होता है जिसके माध्यम से आप Mutual Fund Scheme में इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं. SIP Investment के माध्यम से आप बहुत आसानी से advance और smart तरीके से इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं. इन बेहतरीन फोबिया के वजह से ही सिप इन्वेस्टमेंट आज के समय पर बहुत मशहूर है.

सीप का फुल फॉर्म क्या है?

सीप का पूरा नाम है (Full Form of SIP) “ Systematic Investment Plan ” जैसे हिंदी में (SIP Full Form In Hindi) व्यवस्थित निवेश योजना कहा जाता है.

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एसआईपी का मतलब क्या है?

एसआईपी के बारे में बात करने से पहले चलिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के बारे में जान लेते हैं. दोस्तों इन्वेस्टमेंट के लिए हमें किसी भी कंपनी का शेयर खरीदना होता है लेकिन हर किसी के लिए किसी कंपनी का शेयर खरीदना संभव नहीं होता है. क्योंकि हमें नहीं पता होता है कब मार्केट गिरता है, कब ऊपर जाता है, कब नीचे जाता है, कब नुकसान होता है.

इसी कारण इन छोटे-छोटे इन्वेस्टमेंट के लिए म्यूचुअल फंड से निकाला गया है.बैंक के द्वारा या बरी म्यूच्यूअल फंड कंपनी के द्वारा म्यूच्यूअल फंड सिस्टम (Mutual Fund System) का शुरुआत किया गया. म्यूचल फंड की लिए फंड मैनेजर (Fund Manager) रहता है जो छोटे इन्वेस्टर्स के लिए उनका फंड को मैनेज करते हैं और आपका कैसा इनके हाथों सुरक्षित रहता है क्योंकि इन्हें 10 से 20 साल का तजुर्बा रहता है. 

इसमें आपको 1000, 2000, 5000, 10000 या इससे ज्यादा शेयर खरीदना होता है. लेकिन आपके लिए इसे manage और control करना संभव नहीं होता है और आपका पैसा सुरक्षित भी नहीं रहता है इनकी आपको पता नहीं होता है कि आपका पैसा घाटे में जाएगा या लाभ दिलाएगा. इसी कारण म्यूच्यूअल फंड होता है जिसमें रहता है एसआईपी इन्वेस्टमेंट (SIP Investment). 

एसआईपी का विस्तार पूर्वक जानकारी

म्यूच्यूअल फंड की बात तब आती है जब आप एक शेयर के लिए 1लाख, 5 लाख या 10 लाख रुपए नहीं दे सकते हैं इसके लिए एसआईपी यानी Systematic Investment Plan को निकाली गई है. एसआईपी के नियम अनुसार आप एक हफ्ते, महीने, साल के हिसाब से पैसा जमा करा सकते हैं. जहां पर आप न्यूनतम ₹500 से लेकर कितने भी पैसे जमा करा सकते हैं.

एसआईपी में इन्वेस्ट करने के लिए आपको एक न्यूनतम पैसा जमा कराना होता है. उसके बाद आप जैसे लाखों इन्वेस्टर आपके जैसा ही न्यूनतम पैसा जमा कराते हैं. सभी पैसों को मिलाकर लगभग करोड़ों पैसे जमा होते हैं. इन पैसे को फंड मैनेजर द्वारा म्यूचुअल फंड में लगाया जाता है.

म्यूच्यूअल फंड दो चीजों से बना होता है एक Share Market और दूसरा होता है Bond जो कि लगभग सुरक्षित होता है. अब फंड मैनेजर पूरे पैसे के लगभग 70% शेयर मार्केट में लगा देते हैं और बाकी 30% लगाते हैं bond में. तो SIP Investment में आपका पैसा जाता है फंड मैनेजर के पास और वह उन पैसों को लगाते हैं म्यूचुअल फंड में.

Bond एक सुरक्षित जरिए होने की वजह से वहां से लगभग पॉजिटिव रिजल्ट देखने को मिलते हैं और शेयर मार्केट मैं पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों ही देखने को मिलते हैं लेकिन क्योंकि यह पैसे एक अच्छे experienced fund manager के द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं तो यहां से भी पॉजिटिव रिजल्ट मिलने की ज्यादा संभावनाएं रहते हैं.

तो इसी संकल्पना को लेकर शेयर मार्केट आया है, उससे म्यूच्यूअल फंड आया है और उससे SIP भी आया है. मान लीजिए कोई एक बड़ी कंपनी है और उन्हें 5 करोड़ रुपए की जरूरत है तो वह पैसा आते हैं आप जैसे investors से. वह कैसा जाता है कंपनी के पास कंपनी उन पैसों को बिजनेस में इन्वेस्ट करके प्रॉफिट करते हैं तो आपका भी मुनाफा होता है और लॉस करता है तो आपका भी नुकसान होता है

मान लीजिए आप ₹1000 लगाए थे 1 साल के लिए तो आपका साल में होता है ₹12000. तो इस ₹12000 में अगर आपको 25% रिटर्न मिलता है तो आपका कुल पैसा होता है ₹15000. इस तरह से एसआईपी संकल्पना काम करता है. इसमें आपका नुकसान और फायदा दोनों ही हो सकता है. लेकिन फंड मैनेजर के माध्यम से इन्वेस्ट करने से खतरा कम रहता है.

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दोस्तों आपने क्या सीखा 

दोस्तों यह तो हमारा SIP से संबंधित साधारण बातचीत, हम आशा करते हैं कि हमारा यह लेख आपको बहुत ही आसान भाषा में समझ में आ गया है. यदि आपको हमारा यह लेख helpful, useful और informative लगे है तो इसे अपने दोस्तों के साथ में जरूर शेयर करें. आज हमारे इस सफर को यहीं पर समाप्त करते हैं और मिलते हैं आपसे हमारी अगले नए जानकारी के साथ.

एसआईपी से संबंधी जानकारी के तौर पर आज हम आपको बताए हैं सीप का फुल फॉर्म क्या है, SIP का मतलब क्या होता है, सीप (SIP) किस तरह से काम करता है, इसका फायदा क्या है, इसमें तरह-तरह के विशेषता क्या है. और क्या आपको इसमें इन्वेस्टमेंट करना चाहिए. हमारे साथ हम तक बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तों. Google

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